30 नवंबर मोक्षदा एकादशी,कर ही ले ये उपाय

सिवनी सुप्रभात

अध्यात्म-हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत को महत्वपूर्ण बताया गया है ,प्रतिवर्ष चौबीस एकादशियाँ होती है ,मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकदशी के नाम से जाना जाता है ,और वर्ष 2017 में मोक्षदा एकादशी 30 नवंबर यानि की मोक्षदा एकदशी का पूजन और व्रत 30 नवम्बर को किया जाएगा ,

दक्षिण भारत में इसे वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है ,ये वही दिन है जिस दिन भगवान् कृष्णा ने महाभारत का युद्ध आरम्भ होने से पहले अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था ,इस दिन की गयी पूजा से जन्म जन्मान्तर के पाप नष्ट हो जाते हैं,

पद्मपुराण में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है ,जिसमे भगवन श्री कृष्ण युदिष्ठिर से कहते हैं की इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप आदि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए,ऐसा करने से व्यक्ति के पाप उसी क्षण समाप्त हो जाते हैं ,मोक्षदा एकादशी बड़े से बड़े पापो का नाश करने वाली है ,इस दिन विशेष रूप से उपवास रहकर सम्पूर्ण रात्रि में जागरण ,हरी नाम का सुमिरन ,भजन इत्यादि करना चाहिए ,

एकादशी के इस व्रत का पारण 1 दिसम्बर की रात्रि में होगा ,मान्यता है की इस दिन किया गया कोई भी पूजन या व्रत बड़ा ही विशेष फल देता है ,इस दिन श्रीमद भगवत गीता का पाठ करने से भी विशेष फलो की प्राप्ति होती है ,तो आप भी मोक्षदा एकादशी पर अवश्य ही भगवत गीता का पाठ करे,इसके बाद भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और विष्णु भगवान की प्रतिमा सामने रखें। एक गीता की प्रति भी रखें। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें और स्मरण करें। पूजा के बाद श्री कृष्ण को तुलसी की मंजरियां चढ़ाएं। इस तरह से पूजन करे आपको अवश्य ही विशेष लाभ की प्राप्ति होगी ,

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