बलात्कार के मामले में मध्यप्रदेश फिर रहा अव्वल

भोपाल-मध्यप्रदेश वैसे तो बड़ा ही संस्कारी पुरे देश में मन जाता है लेकिन न जाने क्यों यहाँ पर महिलाओं से सम्बंधित अपराधों में बाकि राज्यों की अपेक्षा अधिकता दिख रही है ,प्राप्त जानकारी के मुताबिक महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में 4,882 की संख्या के साथ मध्यप्रदेश सबसे आगे रहा ,NCRB यानि के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश पिछले वर्ष भी बलात्कार के मामले में अव्वल ही रहा था ,

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट  में यह साफ़ साफ बताया गया है की 28 ,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज कराई गयी है,जिसमे मध्यप्रदेश में 4882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज हुयी, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा यहाँ पर 4816 और महाराष्ट्र 4189 बलात्कार के मामले दर्ज कराये गए ,और सबसे चौकाने वाली बात तो यह है की मध्यप्रदेश में नाबालिक के साथ बलात्कार की घटनाये भी अन्य राज्यों से अधिक है ,

वैसे यह मध्यप्रदेश के लिए सचमुच ही बड़े शर्म की बात है ,हालांकि यह तो सरकारी आकड़े है ,आप भी जानते हैं की असलियत में ये आकड़े और भी बड़े होंगे ,क्योंकि इस तरह के आकड़े ज्यादातर रजिस्टर ही नहीं कराये जाते ,

अब समय आ चूका है की इस तरह की गतिविधियों पर लगाम कसी जाये ,और शायद अब होश भी आ चूका है हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी शिवराज सिंह चौहान ने इस पर नयी कानून व्यवस्था पर लगभग विचार कर लिए है ,प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश का कानून हो सकता है की बलात्कार पर फांसी की सजा ला दे ,हालांकि यह इतना आसान भी नहीं है ,लेकिन खबर आ चुकी है ,

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया, ‘‘मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा की ज़मीनी हक़ीक़त – बेहद शर्मनाक. 2016 में 4882 बलात्कार के मामले, मध्यप्रदेश फिर रेप के मामलों में नम्बर 1.’’ भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इस मामले में कहा कि एनसीबीआर के आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि बलात्कार के अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता के पहचान वाले हैं. इसलिये यह एक सामाजिक समस्या है इसका निपटारा तभी हो सकता है जब समाज खुद सामने आये ,अब देखना ये बाकी है की क्या मध्यप्रदेश में बलात्कार को लेकर नया कानून आता है या फिर यह भी चुनावी प्रपंच में फंस कर रह जाता है ,

बहरहाल हम तो यही कहेंगे इस तरह की गतिविधियां निसंदेह मध्यप्रदेश के लिए कलंक हैं ,जिसका त्वरित समाधान होना चाहिए ,हालांकि सरकार भी इसी पक्ष में अपना कदम मजबूत कर रही है ,और हमें साथ भी देना चाहिए

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