साहूकारों की आयी सामत ,आदिवासी क्षेत्रों में नहीं कर सकेंगे ब्याज का धंधा

सिवनी सुप्रभात

मध्यप्रदेश सरकार ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ब्याज के धंधे को पूरी तरह से बंद करने के बारे में लिया लिए है
यानि की साहूकारी इन क्षेत्रों में पूरी तरह से बंद कर दी गयी है ,अगर कोई साहूकार ब्याज का धंधा करते पाया गया या पकड़ा गया तो तो उस पर दो हजार रूपए
का जुर्माना लगाया जाएगा,

दूसरी बार में जुर्माने की राशि पांच हजार रुपए हो जाएगी और दो साल कैद की सजा भी सुनाई जा सकती है। साहूकारी के लिए पंजीयन का अधिकार पंचायतों को होगा।
सरकार का मानना है की आदिवासी कर्ज लेकर फंस जाते है ,और फिर दबाव के कारण कई बार गलत कदम उठा लेते है ,

ऐसे में उनका विकास नहीं हो पता ,मध्य प्रदेश किसानो का प्रदेश है,पिछले कुछ सालो में किसानो की आत्महत्या की दर बड़ी है ,जिसका एक बड़ा कारण
कर्ज भी है ,कर्ज के बोझ के कारण न तो किसान कर्ज दे पता है ,न ही उसकी कोई तरक्की हो पाती है,साहूकारों द्वारा दबाव या यु कहे की अत्यधिक दबाव के
कारण कई बार किसान आत्महत्या भी कर लेते है ,

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर राजस्व विभाग ने जो मसौदा तैयार किया है कि उसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी के काम पर पूरी तरह रोक रहेगी। यदि कोई उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसे दो साल की कैद और दस हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

गैर कानूनी तरीके से कोई व्यक्ति साहूकारी का काम न कर पाए, इसके लिए पंचायतों को अधिकार दिए जाएंगे। साथ ही पंजीयन के लिए भी पंचायतों को अधिकृत किया जाएगा। यदि कोई ग्राम पंचायत ऐसा प्रस्ताव पारित करती है कि उनके क्षेत्र में साहूकारी का काम न हो, तो वहां प्रतिबंध रहेगा। साहूकार किस ब्याज दर कर्ज देंगे, यह तय करने का अधिकार सरकार का होगा।
अब देखना ये है सरकार की ये कोशिस कहा तक सफल रहती है ,और अगर किसानो को अचनाक पैसों की आवश्यकता हो तो सरकार इसके लिए क्या प्रबंध करती है ,

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