ये है ऐसी टेक्नोलॉजी जो दुनिया को बदल कर रख देंगी

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आज के इस दौर में शायद ही ऐसा कोई होगा जो गूगल और अमेज़न को नहीं जानता होगा,वैसे वर्ष 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस की हैकिंग ने लोगों की चिंताएं बढ़ाने के साथ जाहिर कर दिया कि टेक्नोलॉजी बहुत आगे निकल गई है.
फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के कारण टेक रिसर्च में इन्वेस्टमेंट लगातार बढ़ रही है
मैथमैटिकल मेथेड का दायरा बढ़ने के साथ संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. पिछले पांच सालों में जटिल एल्गोरिदम डीप न्यूरल नेटवर्क्स की मदद से कंप्यूटर्स ने देखना सीख लिया है.
ये हैं वो चीज़े जो दुनिया को बदल देंगी

उड़ने वाली कार

आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे एलन मस्क जैसे आंत्रप्रेन्योर आपके दिमाग में चिप लगाने जैसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. दूसरी तरफ, कुछ आंत्रप्रेन्योर हवा में कार उड़ाने के बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. दुनिया की ये 19 कंपनियां अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट की चीफ एग्जिक्यूटिव लैरी पेज किटी हॉक को सपोर्ट कर रहे हैं. किटी हॉक एक स्टार्टअप है, जो कि फ्लाइंग कार के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. इसके अलावा, जॉबी एविएशन, उबर और एयरबस भी ऐसा व्हीकल बना रहे हैं, जो कि भारी ट्रैफिक वाली सड़कों के ऊपर उड़ सकें. ऐसी कई तरह की कारों पर काम चल रहा है, लेकिन ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में सिंगल राइड है और यह व्हीकल हेलीकॉप्टर की तरह उड़ेंगे. यह देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा की ये चीज़े बाजार में कब आएंगी

कान्वर्सेशनल कंप्यूटिंग

न्यूरल नेटवर्क्स केवल इमेज रिकॉग्निशन तक सीमित नहीं है. इसका दायरा कहीं व्यापक है. यही टेक्नीक अमेजन इको जैसे कॉफी टेबल गैजेट्स में तेजी से सुधार ला रही है, जो कि कमरे में कहीं से भी बोली गई कमांड को तुरंत पहचान लेती है. यही टेक्नीक स्काइप जैसी ऑनलाइन सर्विसेज को भी इम्प्रूव कर रही है, जो कि एक लैंग्वेज में आने वाली फोन कॉल्स को तुरंत दूसरी भाषा में ट्रांसलेट भी कर देता है. गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां इसे मोर्चे पर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, जिससे आगे चलकर फोन, कारों और किसी भी मशीन के साथ हमारे इंटरैक्शन में अहम बदलाव आ सकता है.

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